महाराष्ट्र में कृषि उत्पादन की मजबूत क्षमता है। अब कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं, गुणवत्ता, मूल्यवर्धन और बाजार से जुड़ी व्यवस्थाओं में बड़े निवेश की जरूरत है, यह बात कृषि विपणन मंत्री तथा महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष श्री जयकुमार रावल ने कही। वे ‘मैग्नेट एग्रीबिजनेस इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टर मीट’ के समापन सत्र में बोल रहे थे।
इस अवसर पर विधायक श्री चरणसिंग ठाकूर, कृषि विपणन सचिव श्री प्रवीण दराडे, कृषि विपणन निदेशक तथा महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड के कार्यकारी निदेशक श्री संजय कदम, महाप्रबंधक श्री विनायक कोकरे और निवेशक उपस्थित थे।
मंत्री श्री रावल ने कहा कि इन्वेस्टर मीट में अलग-अलग कृषि उत्पादों पर हुई चर्चा में कई महत्वपूर्ण बातें सामने आईं। केले के क्षेत्र में किसान स्तर पर उपज को एकत्र करने की बेहतर व्यवस्था, जरूरी बुनियादी सुविधाएं, गुणवत्ता बनाए रखने और बाजार से सीधे जुड़ने की जरूरत पर जोर दिया गया। जलगांव और सोलापुर जैसे प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों में जरूरी निवेश से निर्यात के नए अवसर बन सकते हैं।
अनार के लिए निर्यात के योग्य पैकहाउस, अवशेष जांच, ग्रेडिंग, उत्पाद की जानकारी और उसके स्रोत का रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था, कोल्ड चेन और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बेहतर पहुंच की जरूरत बताई गई। खट्टे फलों के क्षेत्र में उपज को एकत्र करने की अच्छी व्यवस्था, फसल के बाद बेहतर प्रबंधन और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर जोर दिया गया। आम के क्षेत्र में निर्यात के लिए जरूरी सुविधाओं, गुणवत्ता, प्रोसेसिंग और देश तथा विदेश के अच्छे बाजारों तक पहुंच बढ़ाने की जरूरत पर चर्चा हुई।
‘हब एंड स्पोक’ मॉडल से मूल्यवर्धन
मंत्री श्री रावल ने कहा कि सभी चर्चाओं में प्रस्तावित ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल को महत्व दिया गया। इस मॉडल में ‘स्पोक’ के माध्यम से किसान स्तर पर कृषि उपज को एकत्र करने और शुरुआती स्तर पर संभालने की व्यवस्था बेहतर की जाएगी। ‘हब’ में आधुनिक प्रोसेसिंग, कोल्ड स्टोरेज, मूल्यवर्धन और निर्यात के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
निवेशकों की अच्छी भागीदारी
मंत्री श्री रावल ने कहा कि इन्वेस्टर मीट में निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, निर्यातकों, किसान उत्पादक कंपनियों, प्रोसेसिंग उद्योग, रिटेल क्षेत्र और वित्तीय संस्थाओं ने अच्छी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि इस मीट का परिणाम केवल चर्चा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इससे वास्तविक निवेश, भागीदारी और परियोजनाएं सामने आनी चाहिए।
मैग्नेट 2.0 के तहत छह प्रमुख कृषि समूहों और आने वाली EOI प्रक्रिया में इस मीट के दौरान मिले सुझावों को ध्यान में रखा जाएगा। प्रस्ताव ऐसे हों जो निवेश और व्यवसाय की दृष्टि से उपयोगी हों, उद्योग की जरूरतों के अनुरूप हों और बाजार की मांग से जुड़े हों।
मंत्री श्री रावल ने कहा कि केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने के बजाय बाजार की जरूरतों को ध्यान में रखकर पूरी व्यवस्था तैयार करनी होगी। केवल कृषि उपज के निर्यात पर ध्यान देने के बजाय अच्छी गुणवत्ता वाले और बाजार की जरूरत के अनुसार तैयार उत्पादों पर भी ध्यान देना होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार, उद्योग, निवेशक और किसानों को मिलकर काम करना होगा। इन्वेस्टर मीट में हुई चर्चा को अब वास्तविक परियोजनाओं, निवेश और भागीदारी में बदलने की जरूरत है।
मंत्री श्री रावल ने कहा कि महाराष्ट्र को कृषि उत्पादन के साथ मूल्यवर्धन पर भी ध्यान देना होगा और निवेश के अवसरों को वास्तविक निवेश में बदलना होगा, ताकि इसका लाभ राज्य के किसानों तक पहुंचे।
















