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दशहरे पर सामने आएगा रामायण का एक नया पाठ: योगेश अरविंद पुराणिक की पुस्तक ‘Decoding The Ramayana’ आधुनिक मन की खोज से जोड़ेगी प्राचीन कथा को

AT हिंदी डेस्क by AT हिंदी डेस्क
September 15, 2026
in धर्म
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दशहरे पर सामने आएगा रामायण का एक नया पाठ: योगेश अरविंद पुराणिक की पुस्तक ‘Decoding The Ramayana’ आधुनिक मन की खोज से जोड़ेगी प्राचीन कथा को
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नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026: रामायण को केवल एक प्राचीन महाकाव्य, धार्मिक आख्यान या नैतिक शिक्षाओं के संग्रह के रूप में देखने के बजाय आधुनिक मनुष्य की आंतरिक दुनिया को समझने के एक माध्यम के रूप में प्रस्तुत करने वाली नई पुस्तक ‘Decoding The Ramayana: An Ancient Blueprint for the Modern Mind’ आगामी 20 अक्टूबर 2026, दशहरे के पावन अवसर पर, दुनिया भर के 100 से अधिक देशों में उपलब्ध होगी।

पुस्तक के लेखक योगेश अरविंद पुराणिक, जो शिक्षाविद्, निवेशक, लेखक और प्रबंधन विशेषज्ञ हैं, रामायण को एक ऐसे दृष्टिकोण से देखते हैं जिसमें इसकी कथा बाहरी घटनाओं के साथ-साथ मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्षों का भी रूपक बन जाती है।

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पुस्तक का मूल प्रश्न यही है कि यदि रामायण की कथा हमारे भीतर भी घटित होती हो, तो उसके पात्र और घटनाएँ हमारे मन, चेतना और जीवन के बारे में क्या कहती हैं?

पुराणिक के अनुसार, युग बदलते हैं, तकनीक बदलती है और जीवन की गति बदलती है, लेकिन मनुष्य की मूल चुनौतियाँ नहीं बदलतीं। इच्छा, मोह, अहंकार, भटकाव, ध्यान का टूटना और जीवन के अर्थ की तलाश आज भी उतने ही प्रासंगिक प्रश्न हैं जितने वे हजारों वर्ष पहले रहे होंगे।

“सबसे महत्वपूर्ण युद्ध लंका में नहीं, हमारे भीतर लड़ा जाता है”

पुस्तक की केंद्रीय अवधारणा को रेखांकित करते हुए लेखक योगेश अरविंद पुराणिक कहते हैं:

“रामायण को हमने सदियों से बाहर घटित होने वाली कथा की तरह पढ़ा है; ‘Decoding The Ramayana’ का प्रयास उसे भीतर घटित होने वाली यात्रा के रूप में देखने का है। राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान और रावण केवल पात्र नहीं, बल्कि हमारे भीतर सक्रिय चेतना, ऊर्जा, ध्यान, जीवन-शक्ति और अहंकार के रूप भी हो सकते हैं। शायद यही कारण है कि हजारों वर्ष पुरानी यह कथा आज के मनुष्य को उतनी ही प्रासंगिक लगती है।”

रामायण को देखने के चार दृष्टिकोण

‘Decoding The Ramayana’ रामायण की कथा को चार प्रमुख आयामों से देखने का प्रयास करती है:

ऐतिहासिक दृष्टिकोण: कथा और उसके व्यापक संदर्भ को समझने का प्रयास।

नैतिक दृष्टिकोण: कर्तव्य, निर्णय, संबंधों और जीवन-मूल्यों से जुड़े प्रश्नों की पड़ताल।

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण: पात्रों और घटनाओं को मानव मन और चेतना में सक्रिय शक्तियों के रूप में देखना।

आध्यात्मिक दृष्टिकोण: चेतना, ऊर्जा और आत्म-बोध की यात्रा को समझना।

इन चार दृष्टिकोणों के माध्यम से पुस्तक प्राचीन भारतीय ज्ञान और आधुनिक जीवन की व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक चुनौतियों के बीच एक संवाद स्थापित करने का प्रयास करती है।

राम, सीता, लक्ष्मण और हनुमान: पात्रों से आगे, चेतना के रूपक

पुस्तक में रामायण के प्रमुख पात्रों की मनोवैज्ञानिक व्याख्या की गई है।

राम को ‘शुद्ध चेतना’ (Pure Consciousness) के प्रतीक के रूप में देखा गया है, जो व्यक्ति को बाहरी घटनाओं से आगे उस मूल जागरूकता की ओर ले जाती है जिसके माध्यम से जीवन का अनुभव किया जाता है।

सीता ‘शुद्ध ऊर्जा’ (Pure Energy) की जीवंत शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनका अपहरण चेतना और ऊर्जा के बीच उत्पन्न बाधा का प्रतीक बनता है और यह संकेत देता है कि आधुनिक अहंकार किस प्रकार हमारे ध्यान और ऊर्जा को अपने प्रभाव में ले सकता है।

लक्ष्मण ‘केंद्रित ध्यान’ (Focused Attention) के प्रतीक हैं। आज के स्क्रीन-प्रधान और लगातार उत्तेजनाओं से भरे वातावरण में ध्यान को एक दिशा में बनाए रखना स्वयं एक महत्वपूर्ण क्षमता बन गया है।

हनुमान जागृत प्राण-शक्ति (Awakened Life Force) का प्रतीक हैं। उनका चरित्र यह दर्शाता है कि जब जीवन-शक्ति को जागरूकता और सही दिशा मिलती है, तो व्यक्ति अपनी सीमाओं से कहीं आगे जा सकता है।

लंका और रावण: बाहरी सफलता बनाम आंतरिक विजय

पुस्तक में लंका को आधुनिक अहंकार के रूपक के रूप में देखा गया है। बाहरी वैभव, शक्ति और उपलब्धियों के बावजूद यदि व्यक्ति लगातार बढ़ती इच्छाओं और नियंत्रण की आवश्यकता से संचालित हो रहा है, तो उसकी बाहरी सफलता जरूरी नहीं कि आंतरिक संतुलन का संकेत हो।

इसी संदर्भ में रावण का चरित्र उस आधुनिक धारणा पर प्रश्न उठाता है कि बाहरी उपलब्धि अपने आप आंतरिक महारत में बदल जाती है।

यह व्याख्या लंका को केवल रामायण के भूगोल का हिस्सा नहीं रहने देती, बल्कि उसे मनुष्य के भीतर मौजूद उस मानसिक संसार के रूपक में बदल देती है जहाँ अहंकार, इच्छा और नियंत्रण की प्रवृत्ति लगातार सक्रिय रहती है।

प्राचीन कथा, आधुनिक प्रश्न

आज जब डिजिटल जीवन, निरंतर सूचनाएँ और बढ़ती व्यस्तता मनुष्य के ध्यान और मानसिक शांति को प्रभावित कर रही हैं, ‘Decoding The Ramayana’ रामायण के माध्यम से कुछ बुनियादी आधुनिक प्रश्नों की ओर लौटती है:

हम अपना ध्यान किसे दे रहे हैं?
हमारी इच्छाएँ हमें संचालित कर रही हैं या हम उन्हें?
बाहरी सफलता के पीछे भागते हुए हम अपने भीतर क्या खो रहे हैं?
और क्या प्राचीन ज्ञान आधुनिक मन को स्वयं को समझने का कोई नया रास्ता दे सकता है?

पुस्तक का निष्कर्ष इसी विचार के आसपास आकार लेता है कि सबसे महत्वपूर्ण संघर्ष बाहरी दुनिया में नहीं, मनुष्य के भीतर होता है।

इस अर्थ में ‘Decoding The Ramayana’ रामायण को अतीत की स्मृति के रूप में नहीं, बल्कि आधुनिक मनुष्य के लिए आत्म-अन्वेषण के एक जीवंत ढाँचे के रूप में पढ़ने का निमंत्रण देती है।

लेखक के बारे में

योगेश अरविंद पुराणिक शिक्षाविद्, निवेशक, लेखक और प्रबंधन नेता हैं। वे ‘The House of Anand Rathore’ और ‘The Tides That Remember’ जैसे उपन्यासों के लेखक भी हैं।

पिछले 25 वर्षों से कॉर्पोरेट क्षेत्र में सक्रिय पुराणिक प्रबंधन और प्रोडक्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में प्रमाणित हैं। उनका कार्य कॉर्पोरेट नेतृत्व और सचेतन जीवन के बीच के संबंधों को समझने पर केंद्रित है।

वर्ष 2019 से वे संस्कारधानी जबलपुर में रह रहे हैं।

पुस्तक: Decoding The Ramayana: An Ancient Blueprint for the Modern Mind
लेखक: योगेश अरविंद पुराणिक

विमोचन: 20 अक्टूबर 2026, दशहरा
उपलब्धता: 100+ देश

Tags: ‘Decoding The Ramayana’Yogesh Arvind Puranik’s book
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