• हमारे बारे में
  • गोपनीयता नीति
  • संपर्क करें
  • गूगल न्यूज़
  • English News
Saturday, August 30, 2025
  • Login
Abhyuday Times Hindi
  • Home
  • भारत
    • राष्ट्रिय
    • क्षेत्रीय
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • ऑटोमोबाइल्स
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • राजनीति
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • ट्रैवल
    • फैशन
    • फ़ूड
    • हेल्थ & ब्यूटी
  • अन्य
    • कृषि
    • दुनिया
No Result
View All Result
  • Home
  • भारत
    • राष्ट्रिय
    • क्षेत्रीय
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • ऑटोमोबाइल्स
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • राजनीति
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • ट्रैवल
    • फैशन
    • फ़ूड
    • हेल्थ & ब्यूटी
  • अन्य
    • कृषि
    • दुनिया
No Result
View All Result
Abhyuday Times Hindi
No Result
View All Result
Home लाइफस्टाइल

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग–3) – ठाकुर दलीप सिंघ जी

AT हिंदी डेस्क by AT हिंदी डेस्क
June 24, 2025
in लाइफस्टाइल
0
यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग–3) – ठाकुर दलीप सिंघ जी
Share on FacebookShare on Twitter

भारत ने किसी भी देश को गुलाम बना कर, इंग्लैंड की तरह अपना साम्राज्य स्थापित नहीं किया। भारत की धर्मपरायणता, नैतिकता, सहिष्णुता, दयालुता, संयम आदि के विपरीत; जिन अंग्रेज़ों ने हर प्रकार की अनैतिकता, कपट, क्रूरता आदि का उपयोग कर के विश्व पर साम्राज्य स्थापित किया: उन की भाषा ‘अंग्रेज़ी’ आज विश्व में तो फैल ही गई है। अपितु, भारत में भी लोग अपनी मातृ-भाषा छोड़ कर, विदेशी अत्याचारी अंग्रेज़ों की भाषा ही अपनाने लगे हैं। भारतीय भाषाएं (जो कि पूरे विश्व में सर्वोत्तम हैं); अपनी मातृभूमि भारत में ही आज लुप्त होती जा रही हैं।

भारतीयों की धार्मिक व आधारहीन सहनशीलता तथा नैतिकता का कड़वा फल, भारतवासियों को तथा भारत को प्रत्यक्ष रूप से यह मिल रहा है कि आज भारत सरकार के सभी विशेष कार्य; किसी भी भारतीय भाषा में नहीं होते, अपितु विदेशी भाषा ‘अंग्रेज़ी’ में होते हैं। भारतीय न्यायालयों में सभी लिखत-पढ़त भी अंग्रेज़ी भाषा में ही होती है। यहाँ तक कि जिस को अंग्रेज़ी न आती हो, भारतीय भाषा का बड़ा विद्वान होते हुए भी उसको अनपढ़ माना जाता है। हालात इतनी बुरी है कि अपने देश को ‘भारत’ कहने में भी हमें शर्म आती है। परंतु, ‘इंडिया’ कहने से गर्व अनुभव होता है। यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो भारत कभी भी ‘हिंदुस्तान’ या ‘इंडिया’ न बनता, सदैव ‘भारत’ही रहता।

संबंधितपोस्ट

भारत की सबसे बड़ी फैशन प्रदर्शनी कंपनी हाईलाइफ एग्जिबिशन द्वारा हाईलाइफ ब्राइड्स प्रदर्शनी २८ और २९ जुलाई को सूरत के होटल मैरियट में आयोजित किया जाएगा

भारत की सबसे बड़ी फैशन प्रदर्शनी कंपनी हाईलाइफ एग्जिबिशन द्वारा हाईलाइफ ब्राइड्स प्रदर्शनी २८ और २९ जुलाई को सूरत के होटल मैरियट में आयोजित किया जाएगा

July 25, 2025
यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 4) – ठाकुर दलीप सिंघ जी

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 4) – ठाकुर दलीप सिंघ जी

July 10, 2025

आज भारतीय भाषाओं में तथा जनता की बोलचाल में उर्दू, फारसी, अरबी, इंग्लिश आदि विदेशी भाषाओं के शब्दों का, अवचेतन मन से ही अधिक उपयोग हो रहा है। यदि भारत ने विश्व पर अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो आज इंग्लैंड सहित पूरे विश्व की विदेशी भाषाओं में भारतीय भाषा के शब्द तो उपयोग होने ही थे; सम्पूर्ण विश्व की जनता भी अपनी बोलचाल में भारतीय शब्दों का उपयोग कर के गर्व महसूस करती, जिस तरह जनता आज अंग्रेज़ी के शब्दों का उपयोग कर के गर्व महसूस करती है।

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो हम भारतीय भी विदेशी भाषाओं के शब्दों से अपने नाम कभी भी ना रखते, जैसे गुलाम रहने के कारण, आज हम भारतीय लोग, विदेशी भाषाओं में अपने नाम रख कर, उन नामों पर गर्व करते हैं, उदाहरण स्वरूप: करनैल सिंघ, जरनैल सिंघ, हनी, लक्की, लवली, जैसमीन आदि अंग्रेज़ी के और हाकम सिंघ, साहिब सिंघ, इबादत कौर, आदि फारसी के नाम हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि भारतीय लोग अपने नाम का सही उच्चारण छोड़ कर, विदेशियों की सहूलत के अनुरूप अपने ही नाम का गलत उच्चारण आरंभ कर देते हैं। जैसे सिंघ को सैम, ढिल्लों को ढिलन, हरभेज को हैरी, गुरभेज को गैरी आदि।

इतना ही नहीं, आज हम भारतीय भाषा में रचे गए नामों का अपभ्रंश व रूपांतरण करके, उन नामों को अंग्रेज़ी में उच्चारण करने लगे हैं। जैसे: भीम राव अंबेदकर को बी.आर. अंबेडकर, महिंदर सिंह धोनी को एम.एस. धोनी, कोच्चेरी रामण नारायणन को के.आर. नारायणन, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आर.एस.एस., मध्यप्रदेश को एम.पी., दूरदर्शन को डी.डी. आदि। और तो और, भारतीयों ने अमृतसर के ‘हरिमंदिर’ को ‘गोल्डन टैंपल’, मोढेरा के ‘सूर्य मंदिर’ को ‘सन्न टैंपल’, लाल किले को ‘रैड्ड फोर्ट; आदि कहना आरंभ कर दिया है। जब कि, वैटीकन ‘सेंट पीटर्स बेसिलिका’ जैसे बड़े गिरजा घरों का नाम, किसी भी भारतीय भाषा के अनुसार नहीं बदला जाता। भारत में भी केवल भारतीय मंदिरों के नाम का ही अंग्रेजी-कर्ण कर के; नाम परिवर्तित किया जाता हैं। परंतु, ईसाइयों के गिरजाघरों के नाम का हिन्दी-कर्ण नहीं किया जाता। जैसे: सेंट पॉल कैथेड्रल चर्च, बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस चर्च आदिक गिरजाघरों का नाम बदल कर, किसी भी भारतीय भाषा के अनुसार नहीं लिया जाता।

इस प्रकार, हम भारतीयों ने भारतीय भाषा में रचे नामों का अंग्रेज़ीकर्ण कर दिया है। यदि भारत ने इंग्लैंड की तरह विश्व पर अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो भारतीय लोग विदेशी भाषाओं में अपने नाम न रखते तथा भारतीय भाषाओं के शब्दों व नामों का रूपांतरण व अपभ्रंश कर के अंग्रेजी में उच्चारण न करते। पूरे विश्व के लोग, भारतीय भाषा में अपने नाम रखते तथा अपनी भाषा के शब्दों का भारतीय भाषा के अनुसार रूपांतरण कर के उच्चारण करते; जैसे, आज हम भारतीय भाषाओं का उच्चारण बिगाड़ कर, भारत में भी अंग्रेजों के अनुसार उच्चारण कर रहे हैं। उदाहरण स्वरूप: राम को रामा, योग को योगा, वेद को वेदा, शास्त्र को शास्त्रा, राग को रागा, गंगा को गेंजस (Ganges), केरल को केरला, कर्नाटक को कर्नाटका, दिल्ली को डेहली, कोलकत्ता को कैलकटा, मुंबई को बौंबे, चीन को चाइना, रूस को रशिया, लाख को लैख आदि कहने लग गए हैं।

यदि भारत ने इंग्लैंड की तरह विश्व पर अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो आज विश्व में अंकल-आंटी आदि अंग्रेज़ी के शब्दों की बजाय चाचा-चाची, मामा-मामी, फूफा-फूफी आदि शब्दों का प्रयोग होना था। अंकल आंटी जैसे शब्दों में तो चाचा-चाचा, मामा-मामी का कोई अंतर ही पता नहीं चलता, जब कि भारतीय भाषा के शब्दों से उन का पूरा अंतर पता चलता है। भारतीय भाषा के भावपूर्ण शब्दों से संबंधों में परस्पर प्रेम और घनिष्टता बढ़ती है।

आजकल सभी मंत्रीगण/राजनेता व अधिकारी: अंग्रेज़ी भाषा में छपे समाचार पत्र ही मुख्यत: पढ़ते हैं एवं उन में छपे समाचारों पर ही विश्वास करते हैं। किसी भी भारतीय भाषा में छपे समाचार पत्र की सूचना को उतनी मान्यता नहीं देते, जितनी मान्यता अंग्रेजी में छपे समाचार पत्र की सूचना को देते हैं। क्योंकि, अंग्रेजी के समाचार पत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समाचार; भारतीय भाषा के समानांतर अधिक विद्वता-पूर्ण व सुंदर ढंग से लिखे होते हैं। क्योंकि, इंग्लैंड का साम्राज्य स्थापित होने कारण, अंग्रेजी भारतीय भाषा से अधिक उन्नत हो चुकी है। लंबे समय तक इंग्लैंड के गुलाम रहने कारण, उत्कृष्ट शैली में ‘अंग्रेजी’ लिखने वाले उत्तम विद्वानों की संख्या भी अधिक है एवं अंग्रेजी में छपने वाले समाचार पत्रों की संख्या भी अधिक है। यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो उत्कृष्ट शैली में ‘भारतीय’ भाषा लिखने वाले उत्तम विद्वानों एवं ‘भारतीय’ भाषा में छपने वाले समाचार पत्रों की संख्या भी अधिक होती तथा विश्व भर के लोग भारतीय भाषा में छपे समाचार पत्र पर छपी सूचना पर ही अधिक विश्वास करते।

यदि भारत ने इंग्लैंड की तरह विश्व पर अपना साम्राज्य स्थापित किया होता, तो आज इंग्लैंड सहित अधिकत्तर देशों की संसदों (पार्लियामेंट) में भारतीय भाषा में चर्चा होती, वाद-संवाद होते; जैसा कि आज भारत की संसद में अंग्रेज़ी में चर्चा एवं वाद-संवाद हो रहे हैं।

विश्व पर या किसी देश पर अपना साम्राज्य स्थापित कर के, वहाँ अपनी भाषा, मज़हब/धर्म तथा सभ्यता फैलाने का अपराधिक व अनैतिक ढंग: इंग्लैंड के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हुआ है। साम्राज्य विस्तार से ही कोई भी भाषा, धर्म तथा सभ्यता सुरक्षित रहती है तथा प्रफुल्लित होती है। साम्राज्य विस्तार किए बिना कोई भी भाषा, धर्म तथा सभ्यता सुरक्षित नहीं रह सकते; प्रफुल्लित होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। सतिगुरु गोबिन्द सिंघ जी ने भी लिखा है “राज बिना नहि धरम चलै है”। इस के साथ ही यह भी एक कटु सत्य है: कम से कम 50% अनैतिकता (क्रूरता, कपट) से ही साम्राज्य स्थापित होता है, स्थापित रहता है तथा साम्राज्य का प्रसार होता है; भले ही समाज इस ढंग को कितना भी अनैतिक तथा अपराधिक मानता है। मनुष्य ने भी तो सभी जीवों से अधिक अनैतिक (पाप कार्य) कर के; क्रूरता, कपट से ही पृथ्वी पर अपना साम्राज्य स्थापित किया है। यदि केवल नैतिकता के शुभ कर्मों से साम्राज्य स्थापित करना संभव होता, तो ससे जैसे शाकाहारी जीव जंगल में शासन करते। फिर सिंह (शेर) को जंगल का ‘सम्राट’ ना माना जाता। इस लिए, साम्राज्य स्थापित करने के लिए क्रूरता, कपट जैसी अनैतिकता करनी अनिवार्य है।

इस लिए, जिस ने भी अपनी भाषा, मज़हब तथा सभ्यता को सुरक्षित कर के प्रफुल्लित करना हो; उसे विश्व पर साम्राज्य स्थापित करना व साम्राज्य स्थापित रखना, अत्यंत आवश्यक है। परंतु, भारत तो ठहरा: दयालु, शांत, सुशील, नैतिक तथा धार्मिक देश। उपरोक्त गुणों का धारणी होने के कारण, भारत ने किसी देश को गुलाम नहीं बनाया; जिस का फल भारत ने स्वयं गुलाम हो कर भोगा है तथा आज तक भोग रहा है। नैतिक व धार्मिक होने के कारण, पूरे संसार को या किसी अन्य देश को गुलाम बना कर, भारत भला अपना साम्राज्य स्थापित क्यों करेगा?

आश्चर्य होता है कि भारत के अधिकतर सम्राटों/नेताओं ने प्रकृति के नियम व अटल सच्चाई को क्यों नहीं समझा एवं क्यों नहीं स्वीकार किया कि केवल नैतिकता के आधार पर हम अपनी भाषा, संस्कृति का पूरे विश्व में प्रचार-प्रसार नहीं कर सकते। जिस किसी भारतीय सम्राट ने इस अटल सच्चाई को स्वीकार कर, किसी अन्य देश पर अपना साम्राज्य स्थापित किया, या विश्व में, जहाँ कहीं भी भारतीय संस्कृति का प्रभाव रहा है; वहाँ आज भी भारतीय भाषा के शब्द प्रचलित है। जैसे: इंडोनेशिया में कभी भारतीय संस्कृति वाले राजाओं ने शासन किया था। जिस कारण, वहाँ बहु-गिनती ‘हिन्दू’ रहते थे। परंतु आज वहाँ बहु-गिनती ‘मुसलमान’ बन चुके हैं। किन्तु, वहाँ के अधिकतर मुसलमान अभी भी, भारतीय भाषा में ही अपने नाम रखते हैं जैसे: सुदर्शन, सीता, अर्जुन आदि। वहाँ की एयरलाइन का नाम भी भगवान विष्णु जी के वाहन ‘गरुड़’ के नाम पर है। वहाँ एक टापू का नाम भी भारतीय भाषा में ‘बाली’ है। यहाँ तक कि वहाँ के एक महिला-राष्ट्रपति का नाम भारतीय भाषा के अनुसार ‘सुकरण पुत्री’ था। भारतीय भाषा में नाम रख कर, वह गर्व महसूस करते हैं; भारतीयों की तरह शर्म नहीं करते।

इसी तरह, थाईलैंड में भारतीय सभ्यता के प्रभाव कारण ही ‘अयोध्या’ नामक शहर है, जो किसी समय वहाँ की राजधानी हुआ करता था। थाईलैंड के राजे के नाम के साथ सम्मान-बोधक विशेषण ‘राम’ लगाया जाता है, जो भगवान राम जी के नाम का प्रतीक है। भारतीय संस्कृति के प्रभाव कारण ही, विष्णु जी का सब से बड़ा मंदिर ‘अंकुर वाह्ट’ कंबोडिया में है।

तात्पर्य यह है कि विश्व में जहाँ भी जिस देश के राजा/सम्राट का शासन होगा, वहाँ उसी का साम्राज्य स्थापित हो कर, उसी की भाषा व संस्कृति प्रचलित हो जाएगी। उस का साम्राज्य हटने के उपरांत भी, वह प्रभाव लंबे समय तक रहता है; जैसे भारत पर अभी भी मुसलमानों का तथा अंग्रेज़-ईसाईयों की भाषा व संस्कृति का प्रभाव है। यदि भारत के अधिकतर सम्राटों के मन में, विश्व पर साम्राज्य स्थापित करने का विचार पहले नहीं आया; तो अब भारत को विश्व पर अपना साम्राज्य स्थापित करने का संकल्प बना लेना चाहिए। क्योंकि, जिस का विश्व पर साम्राज्य स्थापित होता है; उसी की भाषा प्रफुल्लित हो कर, ‘अंतर्राष्ट्रीय भाषा’ बन कर, बिना अधिक प्रयत्न किए, अपने आप लागू हो जाती है। राज-भाषा बनने के कारण, वह भाषा अपनाना लोगों की मजबूरी बन जाती है; जैसे आज अंग्रेज़ी अपनाना लोगों की मजबूरी बन चुकी है। राज-भाषा की नकल करते हुए, फैशन अनुसार, वह भाषा लोगों की ‘मन-चाही भाषा’ भी बन जाती है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:- राजपाल कौर +91 9023150008, तजिंदर सिंह +91 9041000625, रतनदीप सिंह +91 9650066108.

Email: [email protected]

Tags: Thakur Dalip Singh Ji
Previous Post

हाई लाइफ प्रदर्शनी २५ और २६ जून को होटल सूरत मेरियट में आयोजित किया जाएगा।

Next Post

ध्यानगुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी की दृष्टि से आषाढ़ की यात्राएँ : भक्ति, ऊर्जा और पर्यावरण का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समन्वय

AT हिंदी डेस्क

AT हिंदी डेस्क

Related Posts

भारत की सबसे बड़ी फैशन प्रदर्शनी कंपनी हाईलाइफ एग्जिबिशन द्वारा हाईलाइफ ब्राइड्स प्रदर्शनी २८ और २९ जुलाई को सूरत के होटल मैरियट में आयोजित किया जाएगा
फैशन

भारत की सबसे बड़ी फैशन प्रदर्शनी कंपनी हाईलाइफ एग्जिबिशन द्वारा हाईलाइफ ब्राइड्स प्रदर्शनी २८ और २९ जुलाई को सूरत के होटल मैरियट में आयोजित किया जाएगा

by AT हिंदी डेस्क
July 25, 2025
यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 4) – ठाकुर दलीप सिंघ जी
लाइफस्टाइल

यदि भारत ने विश्व पर इंग्लैंड की तरह साम्राज्य स्थापित किया होता! (भाग – 4) – ठाकुर दलीप सिंघ जी

by AT हिंदी डेस्क
July 10, 2025
हाई लाइफ प्रदर्शनी २५ और २६ जून को होटल सूरत मेरियट में आयोजित किया जाएगा।
लाइफस्टाइल

हाई लाइफ प्रदर्शनी २५ और २६ जून को होटल सूरत मेरियट में आयोजित किया जाएगा।

by AT हिंदी डेस्क
June 23, 2025
गांव से राष्ट्र निर्माण तक,कपिल शर्मा की प्रेरणादायक कहानी
लाइफस्टाइल

गांव से राष्ट्र निर्माण तक,कपिल शर्मा की प्रेरणादायक कहानी

by AT हिंदी डेस्क
June 16, 2025
ब्लॉसम कोचर एरोमा मैजिक लेकर आया मोका फेशियल किट: प्रकृति से प्रेरित एक शानदार स्किन रिवाइवल अनुभव
लाइफस्टाइल

ब्लॉसम कोचर एरोमा मैजिक लेकर आया मोका फेशियल किट: प्रकृति से प्रेरित एक शानदार स्किन रिवाइवल अनुभव

by AT हिंदी डेस्क
May 23, 2025
हाईलाइफ प्रदर्शनी का ट्रेंडसेटिंग फैशन शोकेस, गर्मियों के नवीनतम ट्रेंड्स कलेक्शन के साथ २४ और २५ अप्रैल को होटल सूरत मेरियट में आयोजित किया जाएगा
लाइफस्टाइल

हाईलाइफ प्रदर्शनी का ट्रेंडसेटिंग फैशन शोकेस, गर्मियों के नवीनतम ट्रेंड्स कलेक्शन के साथ २४ और २५ अप्रैल को होटल सूरत मेरियट में आयोजित किया जाएगा

by AT हिंदी डेस्क
April 22, 2025
Next Post
ध्यानगुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी की दृष्टि से आषाढ़ की यात्राएँ : भक्ति, ऊर्जा और पर्यावरण का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समन्वय

ध्यानगुरु रघुनाथ येमूल गुरुजी की दृष्टि से आषाढ़ की यात्राएँ : भक्ति, ऊर्जा और पर्यावरण का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समन्वय

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

नवीनतम समाचार एवं लेख

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर श्री चन्द्र भगवान का दर्शन वर्जित

भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर श्री चन्द्र भगवान का दर्शन वर्जित

23 hours ago
फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत के पहले एआई-सक्षम एमएएलई कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम ‘FWD कालभैरव’ की तैयारियों की घोषणा की

फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत के पहले एआई-सक्षम एमएएलई कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम ‘FWD कालभैरव’ की तैयारियों की घोषणा की

4 days ago
आवास योजना: भारत का पहला डिजिटल-फ़र्स्ट हाउसिंग यूनिकॉर्न बनने की ओर

आवास योजना: भारत का पहला डिजिटल-फ़र्स्ट हाउसिंग यूनिकॉर्न बनने की ओर

1 week ago
आवास योजना पर लिस्ट करें अपनी प्रॉपर्टी – 1,000+ बुकिंग्स, ₹1,500 करोड़ का लक्ष्य और देशव्यापी पहुँच

आवास योजना पर लिस्ट करें अपनी प्रॉपर्टी – 1,000+ बुकिंग्स, ₹1,500 करोड़ का लक्ष्य और देशव्यापी पहुँच

1 week ago
आवास योजना पर लिस्ट करें अपनी प्रॉपर्टी – अब हर बुकिंग होगी सुरक्षित और पारदर्शी

आवास योजना पर लिस्ट करें अपनी प्रॉपर्टी – अब हर बुकिंग होगी सुरक्षित और पारदर्शी

1 week ago
आवास योजना: अब हर भारतीय परिवार के लिए सुरक्षित, किफायती और पारदर्शी घर का सपना होगा पूरा

आवास योजना: अब हर भारतीय परिवार के लिए सुरक्षित, किफायती और पारदर्शी घर का सपना होगा पूरा

1 week ago

आपका स्वागत है “अभ्युदय टाइम्स हिंदी” पर! हम यहाँ आपको ताज़ा और महत्वपूर्ण समाचार, विशेष रुचिकर्म लेख, साक्षात्कार, और रोचक जानकारियाँ प्रस्तुत करते हैं।

हमारा लक्ष्य है पाठकों को सबसे अच्छी और सटीक जानकारी प्रदान करना ताकि वे समाज, राजनीति, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, मनोरंजन और अन्य क्षेत्रों में अपडेट रह सकें।

हम गर्व से कहते हैं कि हमारी टीम में उच्च-क्षमता और अनुभवी पत्रकार हैं, जो नैतिकता, सत्यनिष्ठा और पेशेवरिता के प्रति प्रतिबद्ध हैं। हम सभी परिवर्तनों के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए प्रतिबद्ध हैं और अपने पाठकों को एक सुरक्षित, जानकारीपूर्ण और उत्तरदायी माध्यम के माध्यम से जोड़ने का प्रयास करते हैं।

Category

  • ऑटोमोबाइल्स
  • क्षेत्रीय
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • दुनिया
  • धर्म
  • फैशन
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राष्ट्रिय
  • लाइफस्टाइल
  • शिक्षा
  • हेल्थ & ब्यूटी

Follow Us

Recent Posts

  • भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर श्री चन्द्र भगवान का दर्शन वर्जित August 29, 2025
  • फ्लाइंग वेज डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने भारत के पहले एआई-सक्षम एमएएलई कॉम्बैट एयरक्राफ्ट कार्यक्रम ‘FWD कालभैरव’ की तैयारियों की घोषणा की August 26, 2025
  • आवास योजना: भारत का पहला डिजिटल-फ़र्स्ट हाउसिंग यूनिकॉर्न बनने की ओर August 23, 2025
  • हमारे बारे में
  • गोपनीयता नीति
  • संपर्क करें
  • गूगल न्यूज़
  • English News

Copyright © 2023, Abhyuday Times Hindi - Designed & Developed by Brand Maker RD.

No Result
View All Result
  • Home
  • भारत
    • राष्ट्रिय
    • क्षेत्रीय
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • शिक्षा
  • ऑटोमोबाइल्स
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • राजनीति
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • ट्रैवल
    • फैशन
    • फ़ूड
    • हेल्थ & ब्यूटी
  • अन्य
    • कृषि
    • दुनिया

Copyright © 2023, Abhyuday Times Hindi - Designed & Developed by Brand Maker RD.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In